चमोली : “इंसाफ दो वरना नदी में कूद जाऊँगा…” चमोली में मृत प्रसूता का पति दो बच्चो व बूढ़ी मां को लेकर पुल पर धरने पर बैठा । आखिर क्या है वजह

चमोली

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का दर्द कोई नया नहीं है, लेकिन चमोली जिले के थराली से आई इस तस्वीर ने पूरे सूबे को झकझोर कर रख दिया है । बीते दिनों 108 एंबुलेंस में जिंदगी और मौत की जंग हार चुकी लेटाल गांव की गर्भवती महिला सरिता देवी की मौत का मामला अब बेहद तूल पकड़ चुका है।
अस्पताल के चक्कर काटते-काटते जब सिस्टम से इंसाफ नहीं मिला, तो एक बेबस पति अपनी बुजुर्ग मां और अपने दो बिलखते मासूम बच्चों को लेकर थराली-देवाल पुल पर धरने पर बैठ गया। रोते-बिलखते मासूमों की तस्वीरें जिसने भी देखीं, उसकी आंखें नम हो गईं!

थराली का देवाल पुल पर न्याय की भीख मांगता एक पूरा परिवार सड़क पर आ गया। घटना बीते दिनों की है जब थराली के लेटाल गांव निवासी सरिता देवी को प्रसव पीड़ा हुई, तो उम्मीद थी कि थराली के अस्पताल में उन्हें सही इलाज मिलेगा। लेकिन परिजनों का आरोप है कि थराली अस्पताल के चिकित्सा स्टाफ ने घोर लापरवाही दिखाई। समय पर सही इलाज न मिलने के कारण सरिता की 108 एंबुलेंस में ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

 

पत्नी की मौत के बाद बेबस पति इंसाफ के लिए दर-दर भटकता रहा, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो आज उसने खौफनाक कदम उठा लिया। अपनी वृद्ध मां और दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ वह थराली-देवाल पुल पर जा बैठ गया । पीड़ित पति की सिर्फ एक मांग है कि”मेरी पत्नी की हत्या के जिम्मेदार बेपरवाह चिकित्सा स्टाफ पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।

इतना ही नहीं, सिस्टम की बेरुखी से आहत पीड़ित पति ने साफ लफ़्ज़ों में चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा नहीं दी गई, तो वह नीचे उफनती नदी में कूदकर अपनी और अपने परिवार की जीवनलीला समाप्त कर लेगा!

 

जैसे ही युवक के नदी में कूदने की चेतावनी और पुल पर धरने की खबर फैली, थराली प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए थराली के उपजिलाधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम ने काफी देर तक बिलखते परिवार को समझाने की कोशिश की। माहौल की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने युवक को समझा-बुझाकर पुल से सुरक्षित हटाया और मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया।

सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक पहाड़ों में गर्भवती महिलाएं इस तरह इलाज के अभाव में और अस्पताल की लापरवाही से अपनी जान गंवाती रहेंगी? आखिर क्यों एक पीड़ित पति को इंसाफ के लिए अपने छोटे बच्चों की जान जोखिम में डालकर पुल पर बैठना पड़ा? प्रशासन ने फिलहाल जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन देखना होगा कि क्या दोषी स्वास्थ्यकर्मियों पर गाज गिरती है या यह फाइल भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *