ज्योर्तिमठ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 138वें संस्करण का आज ज्योर्तिमठ स्थित मनोहर बाग बूथ संख्या 25 में सामूहिक रूप से सुना गया। इस अवसर पर चारधाम/बीकेटीसी मुख्यमंत्री सलाहकार माधव प्रसाद सेमवाल सहित स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता भी मौजूद थे ।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न विषयों, उपलब्धियों और जनभागीदारी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखंड के प्रति व्यक्त किए गए लगाव और प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत की प्रशंसा का भी उल्लेख हुआ।
माधव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव प्रदेशवासियों के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की परंपराओं, संस्कृति, तीर्थाटन और प्राकृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिया जाना उत्तराखंड के लोगों के लिए उत्साहवर्धक है।
उन्होंने कहा कि ज्योर्तिमठ जैसे ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक नगर में ‘मन की बात’ कार्यक्रम का सामूहिक सुना जाना विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री के विचारों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्र निर्माण, जनभागीदारी और स्थानीय स्तर पर सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरणा मिलती है।
माधव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नागरिकों की उपलब्धियों को देश के सामने रखते हैं। इससे आम नागरिकों को भी अपने स्तर पर समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना और कार्यक्रम के विभिन्न विषयों पर चर्चा भी की। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी, सामाजिक सरोकारों और उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
मनोहर बाग बूथ संख्या 25 में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र एवं प्रदेश के विकास तथा उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।
