चमोली जिले के जंगलो में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं से जहां वन सम्पदा का नुकसान हो रहा है तो वही पहाड़ो की प्राकृतिक सुंदरता और ताजी हवा भी दूषित हो रही है । जिससे देश दुनिया मे प्राकृतिक सुंदरता से अपनी पहचान बनाने वाले देवभूमि उत्तराखंड की छवि धुमिल हो रही है। उत्तराखंड के पहाड़ी अंचलों में हो रही वनाग्नि की घटनाओं से
वन विभाग के अफसर चिंतित और परेशान है । जिसको लेकर अब आला अधिकारी बैठके कर वनाग्नि की घटनाओं को कम करने का समाधान ढूंढने की कोशिश रहे है ।
चमोली जनपद के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगी आग को लेकर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर के डीएफओ सर्वेश कुमार दूबे ने जिला मुख्यालय गोपेश्वर में रेंज अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक ली।
बैठक में डीएफओ ने विभिन्न रेंज अधिकारियों से जंगलों में आग लगने के कारणों, प्रभावित क्षेत्रों और वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर फीडबैक लिया। उन्होंने रेंज अधिकारियों को निर्देश दिए कि वनाग्नि की घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोका जाए और आग पर जल्द काबू पाने के लिए ग्रामीणों की मदद भी ली जाय ।
डीएफओ सर्वेश कुमार दूबे ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि आग बुझाने में वन विभाग का सहयोग न करने वाले ग्रामीणों के खिलाफ वन अधिनियम की धारा 79 के तहत कार्रवाई की जाय। जिसमे एक साल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है ।
डीएफओ सर्वेश कुमार दूबे ने कहा कि वनाग्नि की सूचना मिलते ही विभागीय टीमें लगातार मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग की घटनाएं पर्यावरण और वन्य जीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं, इसलिए स्थानीय लोगों का सहयोग बेहद जरूरी है। बैठक में रेंज अधिकारी भरत नेगी, कपिल गुसाईं, प्रदीप गौड़, नवल किशोर नेगी, विमल भट्ट , व कार्यालय लिपिक हनुमंत बिष्ट, ईश्वर कंडारी, रेखा कंडारी, संदीप कंडारी, रणजीत बर्तवाल आदि मौजूद थे ।
