कर्णप्रयाग
आदिबदरी धाम में आयोजित तीन दिवसीय ऐतिहासिक नौठा कौथीग ( लट्ठमार ) मेला लाठी-डंडों के प्रतीकात्मक युद्ध और लोकसंस्कृति की शानदार प्रस्तुतियों के साथ धूमधाम से संपन्न हो गया। मेले के अंतिम दिन पूरा आदिबदरी क्षेत्र लोकगीतों, ढोल-दमाऊ और पारंपरिक नृत्यों की गूंज से सराबोर रहा।
मेले के तीसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि नौठा कौथीग आज उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और परंपराओं का बड़ा पर्व बन चुका है। उन्होंने मेले के संरक्षण और संस्कृति को जीवित रखने के लिए मेला समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए विधायक निधि से दो लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही मेला स्थल की सुरक्षा दीवार के लिए मुख्यमंत्री द्वारा एक करोड़ रुपये स्वीकृत होने की जानकारी भी दी।
मेले में प्रसिद्ध लोकगायक विवेक नौटियाल ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। नंदा स्तुति से शुरू हुए कार्यक्रम में उन्होंने “बांध ले तू ज्यूडि घास का भारा मां छोरि”, “लागी ते ऊंचा कैलाश दियो”, “रमझम मेरी स्याली बरुण” और “कैन मुल्यायी पैजबी तेरी भली” जैसे लोकप्रिय गीत गाए, जिन पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे।
दोपहर ठीक एक बजे खेती के मालगुजार दिनेश पंवार के नेतृत्व में देव डोली, ढोल-दमाऊ और लाठी-डंडों के साथ नौठा नृत्य दल आदिबदरी मंदिर प्रांगण पहुंचा। यहां परंपरा के अनुसार मेला समिति अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा ने मालगुजार का माल्यार्पण कर सरज की काली टोपी पहनाई और मखमली म्यान सहित तलवार भेंट की। इसके बाद शुरू हुआ लाठी-डंडों का प्रतीकात्मक युद्ध, जिसने मेले का रोमांच चरम पर पहुंचा दिया।
प्रतीकात्मक युद्ध के बाद दोनों दलों के लोग ढोल-दमाऊ की थाप पर जमकर नाचे। विधायक अनिल नौटियाल, कांग्रेस नेता मुकेश नेगी, अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा और विनोद नेगी भी लोकनृत्य में शामिल हुए। बाद में सभी लट्ठमार योद्धा गले मिले और भगवान आदिबदरीनाथ को गेहूं और जौ का नया अनाज अर्पित किया। मेले में गांवों की महिलाओं ने चौंफुला, चांचरी और झुमैलो जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति दी। मेले में भारी भीड़ उमड़ी, जिससे लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन मौसम साफ रहने से व्यापारी बेहद खुश नजर आए। मेलार्थियों ने मिठाइयों, बर्तनों और कपड़ों की जमकर खरीदारी की।
कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत, विनोद सिंह मटूडा, अरुण मैठाणी, टीका मैखुरी, पवित्रा बिष्ट, अधिवक्ता देवेंद्र नेगी, राजेंद्र डिमरी, डॉ. अवतार नेगी और गिरीश डिमरी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। मेला समिति अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन हिमेंद्र कुंवर ने किया।
अंत में मेला समिति अध्यक्ष जगदीश बहुगुणा ने क्षेत्रीय जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
