चमोली
हर वर्ष 15 फरवरी से शुरू होने वाले वन अग्निकाल को देखते हुए केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर के डीएफओ सर्वेश कुमार दूबे ने बताया कि जंगलों को दावानल से बचाने और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विभागीय स्तर पर व्यापक तैयारियां की हैं। उन्होंने कहा गर्मियों में बढ़ते तापमान और सूखे मौसम के बीच जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने अपने कर्मचारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारियां सौंप दी हैं।
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत कुल 243 अधिकारी और कर्मचारी जंगलों की सुरक्षा में दिन-रात जुटे हुए हैं। इनमें 5 रेंजर, 4 डिप्टी रेंजर, 42 फॉरेस्टर, 73 फॉरेस्ट गार्ड और 119 फायर वॉचर शामिल हैं। यह पूरा अमला संवेदनशील वन क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी तरह से आग की घटना पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे के निर्देशन में विभागीय टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जंगलों में नियमित गश्त, फायर लाइन काटना, सूखी पत्तियों की सफाई और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। इसके साथ ही ग्रामीणों और वन पंचायतों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे जंगलों में आग लगाने जैसी गतिविधियों से बचें और किसी भी संदिग्ध घटना की तत्काल सूचना विभाग को दें।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दावानल केवल जंगलों को ही नहीं बल्कि वहां रहने वाले दुर्लभ वन्य जीवों, पक्षियों और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाता है। आग लगने से जैव विविधता प्रभावित होती है और कई बार वन्य जीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इसी को देखते हुए इस बार वन विभाग ने दावानल रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है।
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की टीमें पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में भी लगातार सक्रिय हैं। विभाग का प्रयास है कि जनसहभागिता और सतर्क निगरानी के जरिए इस अग्निकाल में जंगलों को सुरक्षित रखा जा सके और वन संपदा के साथ-साथ वन्य जीवों की भी रक्षा हो सके।
