चमोली
उत्तराखंड के पहाड़ों की पगडंडियों से निकलकर एक बेटी ने सात समंदर पार बैंकॉक के थाइलैंड में वो कमाल कर दिखाया है, जिस पर पूरे देश को गर्व है। चमोली जिले के किमोठा गांव की रहने वाली मुन्नी ने बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय फलक पर तिरंगा लहराया है।
महिला टीम की ओर से खेलते हुए मुन्नी ने कुल 325 किलोग्राम का भारी-भरकम वजन उठाकर दुनिया को हैरान कर दिया। आपको बता दें कि इस प्रतियोगिता में दुनिया भर के 22 देशों के दिग्गज खिलाड़ी हिस्सा लेने आए थे, जिन्हें पछाड़कर चमोली की इस बेटी ने गोल्ड पर कब्जा किया। कर्णप्रयाग पहुचने पर स्थानीय लोगो और कर्णप्रयाग ब्यापार मंडल ने मुन्नी का जोरदार स्वागत किया और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया ।
कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों, तो पहाड़ों का सीना चीरकर भी रास्ता बनाया जा सकता है। उत्तराखंड के चमोली की बेटी मुन्नी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। बेहद विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कड़ी मेहनत करते हुए मुन्नी ने बैंकॉक में पावर लिफ्टिंग के मंच पर देश का नाम रोशन किया है।
मुन्नी का यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ। इसके पीछे सालों की वो तपस्या है जो उन्होंने नेशनल और स्टेट लेवल पर की है। महिला पावर लिफ्टर मुन्नी अब तक
4 बार नेशनल चैंपियनशिप खेल चुकी हैं।
10 बार स्टेट लेवल पर अपनी ताकत का लोहा मनवा चुकी हैं।
इससे पहले भी मुन्नी दिल्ली में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड के खेल गलियारों में मुन्नी के इस प्रदर्शन की गूंज साफ सुनी जा सकती है ।
मुन्नी की कामयाबी को लेकर स्थानीय निवासी संजय लखेड़ा ने कहा कि “हमारे पहाड़ की बेटी ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है, यह हमारे लिए बेहद गर्व की बात है। लेकिन दुख इस बात का है कि पावर लिफ्टिंग में गोल्ड हासिल करने वाली मुन्नी को सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला। न तो उन्हें जाने के लिए आर्थिक मदद दी गई और न ही जीतने के बाद प्रोत्साहित किया गया। अगर सरकार ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों को सही समय पर सपोर्ट करे, तो हमारे पहाड़ों से ऐसी न जाने कितनी प्रतिभाएं निकलकर दुनिया में देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
स्थानीय निवासी संजय लखेड़ा की यह बात खेल सिस्टम पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ी करती है। उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों से हर साल सैकड़ों खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के दम पर आगे आते हैं। 13, 14 और 15 जून को बैंकॉक में जब 22 देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे को चुनौती दे रहे थे, तब मुन्नी बिना किसी सरकारी सहयोग के सिर्फ अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर वहां डटी हुई थीं। सवाल यह है कि आखिर कब तक देश की बेटियां बिना सरकारी मदद के खुद के खर्चे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए मेडल लाती रहेंगी ।
मुन्नी ने 325 किलो का वजन उठाकर मेडल तो जीत लिया, लेकिन अब देखना यह होगा कि क्या प्रदेश सरकार की नींद टूटती है? क्या उत्तराखंड सरकार और खेल मंत्रालय इस प्रतिभावान खिलाड़ी को वो सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन देगा जिसकी वो हकदार हैं? क्योंकि प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नहीं होतीं, लेकिन उन्हें संवारना सरकार की जिम्मेदारी जरूर है।
इस अवसर पर कर्णप्रयाग ब्यापार मण्डल अध्यक्ष बीरेंद्र मिंगवाल, कर्णप्रयाग कॉंग्रेस कमेटी अध्यक्ष महेश खण्डूडी, संजय रावत, हरीश चौहान, सन्दीप कुमार, आदि मौजूद थे
