बिख़ौती कर्ण महोत्सव में कवि सम्मेलन बना आकर्षण का केंद्र, कविताओं के माध्यम से शराब और आपदा के उठाये गम्भीर मुद्दे

कर्णप्रयाग : बिखोती कर्ण महोत्सव के दूसरे दिन कवि सम्म्मलेन कार्यक्रम का शुभारम्भ संगीता बहुगुणा ने मां सरस्वती की बंदना के साथ किया । गढदेशी कला मंच के संस्थापक जयबिशाल ने पहाड़ में दारू के बढ़ते प्रचलन पर कटाछ करते हुए कविता में हे भगवान हे भगवान , कटु कटु करी द्या क्वी इंतजाम बिना दारू का व्है जाया काम की प्रस्तुति दी, श्रीमती बबीता बिष्ट ने मां तू कती स्वाणी कल छै । कवि गितांग विक्रम रावत ने नि व्हे सकडू दग्दया तेरु म्येरु प्यार और उल्टी गंगा बोगणी कविता गाकर अपनी प्रस्तुति दी । सम्मेलन के संचालक तेजपाल निर्मोही ने पहाड़ो में घटित हो आपदाओं को लेकर अपनी कविता क्वे न क्वे प्रकोप होणे होणा छ, आज नी ह्वे तो भोल होंणे छ कविता के माध्यम से स्रोताओं को खूब गुदगुदाया तो भविष्य में सोचने के लिए मजबूर किया । इस अवसर पर नगर पालिकाध्यक्ष गणेश शाह, अधिशाषी अधिकारी नरेन्द्र रावत, अवर अभियंता हरीश मैठाणी, सभाषद सम्पूर्णानन्द डिमरी, बृजेश बिष्ट, चेतन मनोडी, हरीश सती, आदि मौजूद थे

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