कानपुर के दीपक और एमपी के हरिराम गौड़ का संकल्प—चारधाम के साथ 12 ज्योतिर्लिंग भी पहुचेंगे पैदल

चमोली : देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू होते ही आस्था अपने चरम पर है। पहाड़ों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है—कोई हेलीकॉप्टर से बाबा के दरबार पहुंच रहा है, तो कोई सड़क मार्ग से धामों की यात्रा कर रहा है।
लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसे भी भक्त हैं, जिनकी आस्था हर सुविधा से कहीं बड़ी है।
ये वो श्रद्धालु हैं, जिन्होंने न सिर्फ चारधाम बल्कि 12 ज्योतिर्लिंग तक की यात्रा पैदल पूरी करने का संकल्प लिया है।

कंधे पर तिरंगा, दिल में भक्ति और होंठों पर विश्व शांति का संदेश—ये दो भक्त आज पूरे देश के लिए मिसाल बन गए हैं।
तपती धूप… ऊंचे पहाड़… और लंबा सफर… लेकिन आस्था के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।
कानपुर के दीपक चौहान और मध्यप्रदेश के हरिराम गौड़—ये दो ऐसे श्रद्धालु हैं, जो पैदल ही चारधाम यात्रा पर निकले हैं और अब बद्रीनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।

कर्णप्रयाग पहुंचने पर इन दोनों ने बताया कि भगवान के प्रति गहरी आस्था ने उन्हें ये कठिन रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया।
दीपक चौहान, जो दिल्ली में फास्ट फूड का काम करते हैं, कहते हैं कि मन में एक ही विचार आया—जब यात्रा करनी है, तो पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ करनी है… और बस निकल पड़े पैदल।
वहीं हरिराम गौड़ बताते हैं कि उनकी मुलाकात दीपक से रुड़की में हुई… और तब से दोनों एक साथ इस लंबी यात्रा पर हैं।

करीब 20 हजार किलोमीटर की यह कठिन यात्रा… जिसे ये दोनों करीब दो साल में पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
इनकी यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक संदेश भी है…
कंधे पर तिरंगा लेकर ये दोनों देश की एकता, अखंडता और विश्व शांति का संदेश दे रहे हैं।

हर कदम के साथ ये न सिर्फ भगवान के करीब पहुंच रहे हैं… बल्कि समाज को भी एक नई प्रेरणा दे रहे हैं—
कि जब इरादे मजबूत हों, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।
आस्था की ये अनोखी यात्रा सिर्फ कदमों का सफर नहीं… बल्कि विश्वास, संकल्प और देशभक्ति की मिसाल भी है।
जहां एक ओर लोग सुविधाओं के सहारे धामों तक पहुंच रहे हैं… वहीं दीपक और हरिराम जैसे श्रद्धालु ये साबित कर रहे हैं कि सच्ची भक्ति में ना दूरी मायने रखती है और ना ही कठिन रास्ते।
कंधे पर तिरंगा… और दिल में भगवान के प्रति अटूट आस्था लिए ये दोनों भक्त न सिर्फ चारधाम और 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा पूरी करने निकले हैं… बल्कि पूरे देश को एकता, अखंडता और विश्व शांति का संदेश भी दे रहे हैं।

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